्हद ककसी गुब्बयरे में हर्य भरते हैं, तो र्ह फूिकर एक सुांदर रूप िेतय है। उसके
फूिे हुए आकयर को देिकर मन िुश होतय है। िेककन हम उसी गुब्बयरे में जरूरत
से ज््यदय हर्य भर दें, तो र्ह गुब्बयरय फट जयएगय।’ इसी तरह ्हद हम क्षमतय से
ज््यदय िगयतर कयम करेंगे, तो मयनलसक तनयर् बढ़ेगय और हदमयगी तौर पर हम
बीमयर हो जयएँगे।’’ ‘पतझर में टूटी पवत्त्यँ’ पयि में ‘झेन की देन’ के आधयर पर
थपष्ट कीस्जए।

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